संविदाकर्मियों के आंदोलन को मिला समर्थन
तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना, 12 सितंबर 2025 – राजधानी पटना का गर्दनीबाग धरनास्थल शुक्रवार को एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष का केंद्र बना रहा. बर्खास्त विशेष सर्वेक्षण संविदाकर्मियों के आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे माले (भाकपा-माले) महासचिव कॉमरेड दीपंकर भट्टाचार्य ने राज्य सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि,बिहार बदलाव के मुहाने पर खड़ा है.
सत्ता नहीं, नीतियों में बदलाव जरूरी
अपने संबोधन में दीपंकर भट्टाचार्य ने साफ किया कि बदलाव का मतलब केवल सत्ता परिवर्तन नहीं है. उन्होंने कहा कि महज कुर्सी बदलने से कुछ हासिल नहीं होगा, असली बदलाव तभी होगा जब सरकार की नीतियों में परिवर्तन आये.
उनके मुताबिक, मौजूदा एनडीए सरकार नौकरी देने के बजाय नौजवानों से उनकी रोज़ी-रोटी छीन रही है. यही वजह है कि बिहार के युवा आज सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं और आंदोलन की राह पकड़ रहे हैं.
इंडिया गठबंधन का खुला समर्थन
माले महासचिव ने आंदोलनकारियों के बीच जाकर अपना समर्थन जताया और अनशन पर बैठे संविदाकर्मियों को जूस पिलाकर उनका अनशन खत्म करवाया.इस मौके पर उन्होंने कहा कि पूरा इंडिया गठबंधन इस संघर्ष के साथ खड़ा है.
उनका संदेश साफ था – जनता की रोज़ी-रोटी छीनने वाली सरकार को विधानसभा चुनाव में उखाड़ फेंकना ही अब असली जवाब है.
पुलिसिया दमन पर तीखा हमला
भट्टाचार्य ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह युवाओं और संविदाकर्मियों से संवाद करने के बजाय पुलिसिया दमन का सहारा ले रही है.लाठीचार्ज और उत्पीड़न से सरकार का असली चरित्र सामने आ चुका है.उन्होंने चेतावनी दी कि बिहार के नौजवान इस तानाशाही रवैये का करारा जवाब देंगे.
पांच सूत्री मांगों का उठाया मुद्दा
भाकपा-माले महासचिव ने साफ शब्दों में कहा कि संविदाकर्मियों की बर्खास्तगी तत्काल वापस ली जाए, उनकी सेवा को स्थायी किया जाए और उनकी पांच सूत्री मांगों को तुरंत पूरा किया जाये.
उन्होंने सवाल उठाया कि जब आंदोलनकारी युवा केवल स्थायीकरण की मांग कर रहे हैं, तो सरकार उन्हें नौकरी से बाहर कर कैसे सकती है? उनका कहना था कि यह लोकतंत्र और न्याय की बुनियादी भावना के खिलाफ है.
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लोकतंत्र और युवाओं की एकता
अपने वक्तव्य में उन्होंने लोकतंत्र की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में आंदोलनकारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए. स्थायीकरण की मांग का जवाब बर्खास्तगी नहीं हो सकता.
उन्होंने भरोसा जताया कि बिहार के युवा और संविदाकर्मी अपनी एकजुटता से सरकार को झुकाने में सफल होंगे.
आंदोलनकारी मंच पर नेताओं की मौजूदगी
गर्दनीबाग धरनास्थल पर इस दौरान कई प्रमुख नेता भी मौजूद रहे. इनमें कॉमरेड धीरेन्द्र झा, एमएलसी शशि यादव, ऐक्टू के नेता रणविजय कुमार, आइसा के राज्य सह सचिव कुमार दिव्यम, पटना महानगर सचिव जितेन्द्र कुमार और प्रेमचंद कुमार शामिल थे.इन नेताओं ने भी संविदाकर्मियों के संघर्ष को जनता की लड़ाई बताते हुए समर्थन देने का ऐलान किया है.
बिहार की राजनीति में बड़ा असर
विशेष सर्वेक्षण संविदाकर्मियों का आंदोलन बिहार की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन चुका है.विपक्ष इसे सरकार की नाकामी और युवाओं के साथ विश्वासघात बता रहा है.वहीं, सरकार पर लगातार दबाव बढ़ रहा है कि वह जल्द समाधान निकाले.
दीपंकर भट्टाचार्य का यह बयान और सक्रिय समर्थन इस आंदोलन को नई ऊर्जा देता दिखाई दे रहा है. विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इस तरह के मुद्दे एनडीए सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं.
निष्कर्ष
गर्दनीबाग धरनास्थल पर दिया गया दीपंकर भट्टाचार्य का बयान केवल संविदाकर्मियों का समर्थन नहीं था, बल्कि बिहार की राजनीति में बदलाव का संदेश भी था. उनका स्पष्ट कहना था कि यह लड़ाई सिर्फ नौकरी की नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और नीतिगत बदलाव की लड़ाई है.
युवाओं और संविदाकर्मियों का यह संघर्ष आने वाले महीनों में राज्य की राजनीति को किस दिशा में मोड़ेगा, यह देखना दिलचस्प होगा.

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