मॉडल स्कूलों के उद्घाटन पर राजद का हमला, शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

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Ajit Kumar

बिहार
बिहार में मॉडल स्कूलों के उद्घाटन को लेकर शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए बयान देते राजद प्रदेश प्रवक्ता अरुण कुमार यादव.

अरुण यादव बोले- पहले सरकारी स्कूलों की बुनियादी समस्याएं दूर करे सरकार

तीसरा पक्ष ब्यूरो पटना : राजद (राष्ट्रीय जनता दल) ने बिहार सरकार की शिक्षा नीति और मॉडल स्कूलों के उद्घाटन को लेकर सवाल उठाए हैं. पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अरुण कुमार यादव ने कहा कि केवल मॉडल स्कूलों का उद्घाटन और उसका प्रचार-प्रसार करने से राज्य की शिक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं होगी. उन्होंने सरकार से सरकारी विद्यालयों की बुनियादी समस्याओं के समाधान पर प्राथमिकता देने की मांग की है.

अरुण कुमार यादव ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में शिक्षा के प्रति गंभीर है, तो उसे सबसे पहले उन चुनौतियों का समाधान करना चाहिए जिनका सामना आज भी अधिकांश सरकारी विद्यालय कर रहे हैं.उनका कहना है कि शिक्षकों की कमी, जर्जर भवन, प्रयोगशालाओं का अभाव, पुस्तकालयों की कमी और खेल सुविधाओं की अनुपलब्धता जैसी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं.

सरकारी स्कूलों की स्थिति पर उठाए सवाल

राजद प्रवक्ता के अनुसार बिहार के कई सरकारी विद्यालय आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं. उनका कहना है कि विद्यालयों में पर्याप्त संख्या में नियमित शिक्षक नहीं हैं, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है. कई स्कूलों में भवनों की स्थिति खराब है, जबकि विज्ञान प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय और खेल संबंधी सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं हैं.

उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में केवल कुछ मॉडल स्कूलों का उद्घाटन कर शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार का दावा करना वास्तविक स्थिति को नहीं बदल सकता. उनके अनुसार सरकार को पहले उन विद्यालयों पर ध्यान देना चाहिए जहां बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं.

शिक्षक नियुक्ति को लेकर सरकार से जवाब की मांग

अरुण कुमार यादव ने सरकार से चौथे चरण की शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया पर स्पष्ट जानकारी देने की मांग की है.उन्होंने कहा कि लाखों छात्र-छात्राओं का भविष्य नियमित शिक्षकों की नियुक्ति और बेहतर शिक्षण व्यवस्था पर निर्भर करता है.

उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक सुविधाएं जैसे स्मार्ट क्लास और ई-लाइब्रेरी उपयोगी हैं, लेकिन इनका लाभ तभी मिलेगा जब विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक और आवश्यक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध होंगे.उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था की मजबूती का आधार मानव संसाधन और बुनियादी ढांचा है.

महागठबंधन सरकार के कार्यकाल का किया उल्लेख

राजद प्रवक्ता ने अपने बयान में महागठबंधन सरकार के 17 माह के कार्यकाल का भी उल्लेख किया है . उन्होंने दावा किया कि उस अवधि में शिक्षा विभाग में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए थे. उनके अनुसार बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) के माध्यम से बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्तियां हुईं और लाखों नियोजित शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा प्रदान किया गया.

उन्होंने कहा कि इन कदमों से शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में प्रयास किए गए थे.साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान एनडीए सरकार बनने के बाद शिक्षा व्यवस्था फिर से प्रभावित हुई है.

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शिक्षा व्यवस्था पर राजनीतिक बहस

बिहार में शिक्षा हमेशा से राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का महत्वपूर्ण विषय रही है. शिक्षक भर्ती, विद्यालयों की गुणवत्ता, बुनियादी सुविधाएं और छात्रों को बेहतर शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराना सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के एजेंडे में शामिल रहते हैं.

हाल के दिनों में राज्य सरकार द्वारा विभिन्न मॉडल स्कूलों के उद्घाटन और शिक्षा क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं के विस्तार की बात कही गई है.वहीं विपक्ष का कहना है कि इन पहलों के साथ-साथ सरकारी विद्यालयों की मूलभूत समस्याओं का समाधान भी समान रूप से आवश्यक है.

शिक्षा सुधार में क्या हो सकती हैं प्राथमिकताएं?

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी राज्य की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए केवल आधुनिक भवन या डिजिटल सुविधाएं पर्याप्त नहीं होतीं. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता, नियमित नियुक्तियां, सुरक्षित विद्यालय भवन, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, खेल सुविधाएं और प्रभावी शैक्षणिक प्रबंधन समान रूप से महत्वपूर्ण होते हैं.

यदि इन सभी पहलुओं पर संतुलित रूप से कार्य किया जाए, तो सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता में व्यापक सुधार संभव हो सकता है.

निष्कर्ष

राजद प्रदेश प्रवक्ता अरुण कुमार यादव का कहना है कि बिहार सरकार को मॉडल स्कूलों के उद्घाटन के साथ-साथ सरकारी विद्यालयों की वास्तविक समस्याओं के समाधान पर भी समान गंभीरता से काम करना चाहिए. उन्होंने विशेष रूप से शिक्षकों की नियुक्ति, विद्यालयों की आधारभूत सुविधाओं और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार को प्राथमिकता देने की मांग की. वहीं, सरकार की ओर से इन मुद्दों पर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर आने वाले समय में नजर रहेगी.

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