सारण में गंडक बांध टूटने से बाढ़, राहत-बचाव तेज करने की मांग

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Ajit Kumar

बिहार
सारण में गंडक नदी के बांध टूटने के बाद बाढ़ प्रभावित इलाका

भाकपा माले ने मकेर समेत प्रभावित इलाकों में तत्काल राहत, सर्वेक्षण और बांधों की तकनीकी जांच की मांग की

तीसरा पक्ष ब्यूरो: सारण जिले में गंडक नदी के बांध टूटने के बाद कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर होने की बात सामने आई है. भाकपा माले के अनुसार, जिले में दो स्थानों पर बांध टूटने से मकेर, अमनौर, परसा और दरियापुर प्रखंडों के बड़ी संख्या में गांव बाढ़ के पानी से प्रभावित हुए हैं. पार्टी ने सरकार और प्रशासन से राहत एवं बचाव अभियान तत्काल तेज करने की मांग की है.

भाकपा माले के सारण जिला सचिव हंसनाथ राम के नेतृत्व में पार्टी की टीम ने 1 अक्टूबर 2026 को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया. पार्टी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, इस दौरान जिला कमिटी के सदस्य एवं छात्र नेता कुणाल कौशिक, विकास पासवान, नीरज पासवान, हिमांशु और बिजेंद्र मिश्र भी मौजूद रहे.

छपरा-मुजफ्फरपुर हाइवे पर भी बाढ़ का असर

भाकपा माले के नेताओं के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के दौरे के दौरान छपरा-मुजफ्फरपुर हाइवे पर कई जगहों पर कमर से लेकर छाती तक पानी बहता हुआ मिला. इससे सड़क पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने की बात कही गई है.

पार्टी के अनुसार, गंडक नदी के बांध और फूलवरिया नहर के बीच लगभग पांच किलोमीटर के इलाके में आने वाले कई गांव बाढ़ के पानी में डूब गए हैं. बड़ी संख्या में लोगों के घरों में फंसे होने और कुछ लोगों के बांध तथा नहर के किनारे ऊंचे स्थानों पर शरण लेने की जानकारी भी पार्टी ने दी है.

फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए ट्रैक्टर और नाव का इस्तेमाल किए जाने की बात प्रेस विज्ञप्ति में कही गई है.प्रभावित परिवारों द्वारा अपने स्तर पर जरूरी सामान निकालने की कोशिश की गई है, लेकिन पार्टी ने बड़ी मात्रा में संपत्ति के नुकसान की आशंका जताई है.

मकेर प्रखंड सबसे अधिक प्रभावित होने का दावा

भाकपा माले ने मकेर प्रखंड को सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में बताया है.पार्टी के अनुसार, हैजलपुर और महेश छपरा के बीच बांध टूटने से मकेर के कई गांव बाढ़ की चपेट में आए हैं.

इसके अलावा अमनौर, परसा और दरियापुर प्रखंड के कई गांवों में भी बाढ़ का गंभीर असर होने की बात कही गई है. भगवानपुर गांव के सामने बांध टूटने के बाद पानापुर प्रखंड के कई इलाकों में पानी फैलने का दावा भी पार्टी ने किया है.

पार्टी के मुताबिक, भगवानपुर में बने नए पुल के पास पानी के रिसाव से तेज धार बनने की स्थिति पैदा हुई.वहीं सलेमपुर गांव में बांध टूटने की आशंका के बाद ग्रामीणों ने रात में एकजुट होकर पानी को रोकने का प्रयास किया.

सारण में गंडक नदी के बांध टूटने से कई गांवों में बाढ़ की स्थिति तीसरा पक्ष

प्रभावित गांवों और परिवारों के आकलन की मांग

भाकपा माले का कहना है कि चारों प्रखंडों में कितने गांव और कितने परिवार बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, इसका तत्काल आकलन करना मुश्किल है. पार्टी ने बाढ़ से जान-माल और संपत्ति के बड़े नुकसान की आशंका जताते हुए प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सर्वेक्षण कराने की मांग की है.

यह मांग ऐसे समय में सामने आई है जब बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए सुरक्षित स्थान, भोजन, पेयजल और चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाओं की आवश्यकता बढ़ जाती है। पार्टी ने सरकार से राहत सामग्री और बचाव संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने की मांग की है.

सारण में गंडक नदी के बांध टूटने से कई गांवों में बाढ़ की स्थिति 1 तीसरा पक्ष

बांधों के रख-रखाव पर भाकपा माले ने उठाए सवाल

भाकपा माले ने अपने बयान में कहा है कि गंडक नदी से हर साल बाढ़ का खतरा बना रहता है.इसके बावजूद पार्टी ने बांधों और नहरों की निगरानी तथा रख-रखाव को लेकर प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया है.

पार्टी का कहना है कि यदि समय रहते बांधों की मजबूती और सुरक्षा पर पर्याप्त ध्यान दिया जाता तो बांध टूटने की स्थिति को टाला जा सकता था. भाकपा माले ने इस पूरे मामले की जांच कराने और लापरवाही के लिए जिम्मेदार पदाधिकारियों एवं एजेंसियों पर कार्रवाई की मांग की है.

यह आरोप भाकपा माले की ओर से लगाए गए हैं.बांध टूटने और रख-रखाव में कथित लापरवाही को लेकर संबंधित सरकारी विभाग या प्रशासन का पक्ष इस प्रेस विज्ञप्ति में शामिल नहीं है.

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भाकपा माले ने सरकार के सामने रखीं सात मांगें

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए भाकपा माले ने सरकार से कई तत्काल कदम उठाने की मांग की है.इनमें बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और राहत-बचाव अभियान तेज करना प्रमुख है.

पार्टी ने ऊंचे स्थानों, बांधों और अन्य सुरक्षित जगहों पर शरण लिए लोगों को भोजन, पेयजल, दवा, रोशनी, बिछावन और तिरपाल जैसी आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है.

इसके अलावा बांध पर शरण लिए लोगों की विशेष निगरानी और सुरक्षा, बांधों तथा नहरों की तकनीकी जांच, रिसाव वाले स्थानों की तत्काल मरम्मत और बाढ़ से हुए जान-माल एवं संपत्ति के नुकसान का सर्वेक्षण कराने की मांग की गई है.

भाकपा माले ने प्रभावित इलाकों में नाव, ट्रैक्टर, राहत सामग्री और अन्य आवश्यक संसाधनों की संख्या बढ़ाने की भी मांग की है.साथ ही बांध टूटने और रख-रखाव में कथित लापरवाही की जांच कर जिम्मेदार लोगों और एजेंसियों पर कार्रवाई की मांग रखी गई है.

सारण में अब राहत और बचाव पर नजर

गंडक नदी के बांध टूटने से प्रभावित बताए जा रहे सारण के इलाकों में इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा और आवश्यक राहत पहुंचाने की है.भाकपा माले ने सरकार और प्रशासन से राहत-बचाव कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने तथा प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता देने की मांग की है.

बाढ़ से वास्तविक रूप से कितने गांव, परिवार और संपत्ति प्रभावित हुई है, इसका आधिकारिक सर्वेक्षण सामने आने के बाद नुकसान की विस्तृत तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी.फिलहाल भाकपा माले ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति को गंभीर बताते हुए तत्काल राहत, बांधों की जांच और नुकसान के आकलन की मांग उठाई है.

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